कान का कच्चा होना मुहावरें का अर्थ क्या होता है- Kaan ka Kachcha Hona Meaning in Hindi.

Kaan ka Kachcha Hona Muhavara Meaning in Hindi / “कान का कच्चा होना” मुहावरे का हिंदी मे अर्थ।

मुहावरा - “कान का कच्चा होना”।

“कान का कच्चा होना” मुहावरे की व्याख्या।

कान का कच्चा होना, हिंदी का एक मुहावरा है। इस मुहावरे का प्रयोग किसी विशेष परिस्थिति के लिए किया जाता है। जैसे कि जब कोई व्यक्ति अन्य किसी के द्वारा कही बात पर सरलता से विश्वास कर लेता है। दूसरे व्यक्ति के द्वारा कही बात के ही आधार पर अपने निर्णय ले लेते है। उस बात का विश्लेषण तक नहीं करते है। और इस आधार पर उनके द्वारा लिया गया निर्णय हमेशा उनके लिए प्रतिकूल साबित होता है। ऐसे व्यक्ति, जो लोग दूसरे की कही बात के आधार पर ही अपने निर्णय लेते है, परिणाम स्वरूप उनके सम्बन्ध सबसे ख़राब होते चले जाते है।

Kaan ka Kachcha Hona Muhavara Meaning in Hindi / “कान का कच्चा होना” मुहावरे का अर्थ।

  • मुहावरा – “कान का कच्चा होना”।
  • मुहावरे का हिंदी मे अर्थ – बिना सोंचे समझे किसी अन्य व्यक्ति के कही बात पर विश्वास कर लेना / किसी व्यक्ति के व्दारा कही झूठी बात के बहकावे में बहुत ही आसानी से आ जाना।

“कान का कच्चा होना” मुहावरें का वाक्य प्रयोग / Kaan ka Kachcha Hona Muhavare ka Vaky Prayog.

उदाहरण 1.

रामू “कान का बहुत ही कच्चा लड़का है”। रामू के एक दोस्त ने उससे एक झूठी बात बताई। रामू के दोस्त ने उससे कहा कि शेखर उसको धोखा दे रहा है। रामू और शेखर पक्के दोस्त है। अपने दोस्त की बातो में आकर रामू ने शेखर से झगड़ा कर लिया। इनके बीच झगड़ा लगाने उद्देश्य से तीसरे दोस्त ने रामू से झूठ बोला था। रामू जैसे दोस्त के लिए यह मुहावरा “कान का कच्चा होना” विल्कुल सटीक बैठता है।

उदाहरण 2.

हमारे मुहल्ले में एक चाचा जी है। उनसे मुहल्ले का हर एक व्यक्ति बात करने से कतराता है। क्योंकि चाचा जी “कान के बहुत ही कच्चे है”। वह किसी के भी बात का आसानी से विश्वास कर लेते है। इसलिए प्रायः उनकी लड़ाई किसी न किसी से हो जाती है। चाचा जी दूसरे की बात पर विश्वास करके तीसरे व्यक्ति से झगड़ा कर लेते है। और मुहल्ले को जानबूझकर उनके इस कमजोरी का फायदा उठाते है।

उदाहरण 3.

राहुल की मम्मी उसे समझा रहीं थी कि बेटा “कान का कच्चा होना ठीक बात नहीं है”। आगे उन्होंने राहुल को समझाते हुए कहा कि दुसरो की बात का आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए। और खासकर ऐसी स्थिति में जब कोई तुमसे किसी की बुराई कर रहा हो। हो सकता है वह व्यक्ति अपना हित साधने के लिए ऐसा कर रहा हो। जिससे कि वह आपको उस व्यक्ति के प्रति भड़का रहा हो। आगे राहुल की मम्मी ने बताया कि हमेशा कोई भी निर्णय लेने से पहले उस बात विश्लेषण करो। उसके बाद अपने विवेक से निर्णय लो। ऐसे करना एक अच्छे व्यक्ति की पहचान होती है। और उस व्यक्ति के सम्बन्ध सबके साथ अच्छे होते है।

उदाहरण 4.

जो लोग कान के कच्चे होते है समाज में ऐसे व्यक्तियों स्वीकार्यता कम होती है। उनके सम्बन्ध समाज के हर व्यक्ति के साथ दिन प्रतिदिन बेकार होते चले जाते है। इसलिए “कान का कच्चा होना” ठीक बात नहीं होती है।

उदाहरण 5.

दो दोस्तों के बीच आपस में बहुत बुरा झगड़ा गया था। उनको किसी ने समझाया कि बहुत सोंच समझकर कोई भी फैसला लेना चाहिए। इस तरह “कान का कच्चा होना” ठीक बात नहीं है। क्योकि एक बार सम्बन्धो में कड़वाहट आ जाने के बाद, उसको दुबारा सुधारना बहुत मुश्लिक है।

 

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